January 23, 2011

मोहब्बतें


सूरज की आँखों से

दुनिया जाने कैसी दिखती होगी
दो रंगों में बंटी
आधी काली, आधी सफ़ेद दिखती होगी
सूरज की आँखों से
कुछ छुप ना पाता होगा
जितनी बुरी, जितनी अच्छी, जैसी भी
दुनिया का नक्शा दिख जाता होगा
सूरज फिर भी चक्कर काटे
धरती संग दिन रात बांटे
दोनों का गहरा नाता है
सूरज ये रिश्ता खूब निभाता है
बस यही प्यार की कहानी है
धरती सूरज की दीवानी है
जो जैसा है, बस उसको ही चाहे
तो कोई क्यूँ ना वापस प्यार निबाहे?

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