February 25, 2008

hmmm...


रेत पे तेरे पैरों के निशाँ
कुछ गीले कुछ सूखे से होंगे
कल किसी समंदर किनारे
तेरे बोल कुछ गहरे से होंगे
कुछ थक जायेंगे जब तेरे कदम
मेरे पैरों पे तुम चल लेना
एक हो जाएँ जब सारे निशाँ
बस सपने बुनते रहने देना
इक हँसी की मिठास
तोडे़गी खट्टी दीवारें सारी
बस फ़िर ना आने पायेंगी
आंखों में बूँदें खारी
जब सारे शब्द गुम हो जायेंगे
मैं तुम संग गुनगुना लूंगा
कल जब सूरज थक जाएगा
मैं तेरी रौशनी में नहा लूंगा

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